

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के एक बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय ने अपना कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग की अदालत ने मुख्य आरोपी साहिल गेंड्रे को गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्य छिपाने और पुलिस को गुमराह करने वाले उसके साथी अमोल मॉरिस पीटर को भी 3 वर्ष की सजा दी गई है।
आधी रात का खूनी मंजर: क्या थी पूरी घटना?
अभियोजन पक्ष और सरकारी वकील थानेश्वर वर्मा के अनुसार, यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना 3 मार्च 2025 की रात लगभग 1:00 बजे की है। शहर से सटे ग्राम मिशन परसा भदेर में आरोपी साहिल गेंड्रे और मृतक ज्ञानेश मिश्रा के बीच विवाद हुआ।
हमला: आवेश में आकर साहिल ने चाकू से ज्ञानेश की जांघ पर ताबड़तोड़ तीन वार किए।
परिणाम: घाव इतने गहरे थे कि अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। गंभीर हालत में ज्ञानेश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
साजिश: हत्या के बाद साहिल ने अपने दोस्त अमोल मॉरिस पीटर को मौके पर बुलाया। साहिल खुद फरार हो गया, जबकि अमोल ने वहां रुककर पुलिस और परिजनों को मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर गुमराह करने की कोशिश की।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं
मृतक के भाई हर्षित मिश्रा की रिपोर्ट पर सिटी कोतवाली बलौदाबाजार ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और कड़ाई से पूछताछ के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआत में मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दर्ज किया गया था।
अदालत में दलीलें: 14 गवाहों ने खोली पोल
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील थानेश्वर वर्मा ने बेहद प्रभावी ढंग से पक्ष रखा:
साक्ष्यों का अंबार: अभियोजन पक्ष ने कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिन्होंने घटनाक्रम की पुष्टि की।
तार्किक बहस: लोक अभियोजक ने दलील दी कि जिस क्रूरता से हमला किया गया और बाद में पुलिस को गुमराह किया गया, वह अक्षम्य है।
न्यायालय का फैसला: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश विवेक गर्ग ने साक्ष्यों के आधार पर सजा का ऐलान किया।
सजा का विवरण
न्यायालय ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:
आरोपी का नाम धारा (BNS) सजा का प्रावधान जुर्माना
साहिल गेंड्रे (मुख्य आरोपी) धारा 105 10 वर्ष कठोर कारावास ₹1,000
अमोल मॉरिस पीटर (सह-आरोपी) धारा 238 03 वर्ष कठोर कारावास
“न्याय की जीत”
बलौदाबाजार के इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि अपराध कितना भी शातिर तरीके से क्यों न किया गया हो, कानून के लंबे हाथों से बच पाना नामुमकिन है। परिजनों ने न्यायालय के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है।




